तरह के होते हैं फिंगरप्रिंट फिर भी ये किसी से मैच नहीं करते, जानिए इससे जुड़ी दिचलस्प बातें
हमारे पास फिंगरप्रिंट्स क्यों होते गुप्तचर का कार्य क्या होता है? यह सवालों पर ज्यादातर लोगों का जवाब होगा- चीजों को पकड़ने में मदद करना और स्मार्टफोन का लॉक ओपन करने में मदद करना। लेकिन कुछ वैज्ञानिक इसे स्वीकार नहीं करते। जानिए इससे जुड़ी ऐसी ही दिलचस्प बातें...
जोखिमा (फिंगरप्रिंट) का काम क्या होता है? यह सवाल पर ज्यादातर लोगों का जवाब होगा- चीजों को पकड़ने में मदद करना और स्मार्टफोन का लॉक खोलने में मदद करना। लेकिन मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की पड़ताल में जो चीजें सामने आई हैं, वो इसके उलट हैं। वैज्ञानिक कहते हैं, ये सारी चीजें पकड़ने की क्षमता को कम कर देती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अचूक अटकलों का काम क्या है?
दुनिया में कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जिनके बारे में अटकलें नहीं होती हैं। इस स्थिति को एडरमेटोगलाफिया कहते हैं। यह एक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी है। इससे जूझने वाले जनमजात इस बीमारी के साथ पैदा होते हैं और उनके हाथों में योजना नहीं होती है।
जोखिमा (फिंगरप्रिंट) का काम क्या होता है? यह सवाल पर ज्यादातर लोगों का जवाब होगा- चीजों को पकड़ने में मदद करना और स्मार्टफोन का लॉक खोलने में मदद करना। लेकिन मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की पड़ताल में जो चीजें सामने आई हैं, वो इसके उलट हैं। वैज्ञानिक कहते हैं, ये सारी चीजें पकड़ने की क्षमता को कम कर देती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अचूक अटकलों का काम क्या है?
अलग-अलग वैज्ञानिकों ने अनुमानों के काम भी अलग-अलग बताएं। जैसे- कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि ये कनेक्शन की संवेदनशीलता को बढ़ावा देते हैं। यानी जब हम किसी चीज को छूते हैं तो उसकी बेहतर शिकायत में मदद करते हैं। इस तरह ये फोटोशॉप को सुरक्षित रखने का काम भी करते हैं।
कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि ये चीजें पकड़ने में मदद करती हैं। वहीं, कोलोराडो के वैज्ञानिकों का मानना है कि कुछ जुड़वाँ पर बैक्टीरिया होते हैं जो इसे अलग-अलग बाँधते हैं बैक्टीरिया को लेकर भी जोखिम का रोल होता है। इसे एक जेल की मदद से अल्ट्रावॉयलेट लाइट में देखा जा सकता है, जैसा कि इस तस्वीर में देखा जा सकता है।
Finger print यूनिक होते हैं, यह तो सभी जानते हैं, लेकिन क्या आप आसानी से कर सकते हैं कि ये तीन तरह के होते हैं। इनके नाम हैं, आर्च, दयनीय और आभासी दृष्टिकोण। एक बच्चे के में संकल्प बनने की शुरुआत तब ही हो जाती है जब वह मां की कोख में केवल 7 महीने का होता है। दुनिया में कोई भी इंसान की चेतावनी से मेल नहीं खाता, फिर वो चाहे वह जुड़वा ही क्यों न हो।
दुनिया में कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जिनके बारे में अटकलें नहीं होती हैं। इस स्थिति को एडरमेटोगलाफिया कहते हैं। यह एक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी है। इससे जूझने वाले जनमजात इस बीमारी के साथ पैदा होते हैं और उनके हाथों में योजना नहीं होती है।
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